एनडीआरएफ की टीम ने यमुना से खोजें दरोगा सिपाही सहित नाविक के शव
14घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बरामद हुई नाव और तीनों शव
पुलिस लाइन में सलामी के बाद परिजनों के साथ रवाना हुए शव
फतेहपुर, थाना किशनपुर क्षेत्र की संगोलीपुर मड़ैयन यमुना घाट के निकट शनिवार शाम लाॅक डाउन का जायजा लेने निकली पुलिस टीम के तेज आंधी के चलते नाव डूबने से लापता दरोगा और सिपाही सहित नाविक के शव कड़ी मशक्कत के बाद रविवार सुबह करीब साढ़े दस बजे तक बनारस से आई एनडीआरएफ टीम के सहयोग से खोज लिये गये।
बताते चलें कि शनिवार को किशनपुर थाने में तैनात उपनिरीक्षक रामजीत हमराही सिपाहियो शशिकांत और निर्मल यादव को साथ लेकर नाव से बांदा जनपद की सीमा सील होने के बावजूद बांदा जिले की ओर से यमुना नदी पार करके लाॅक डाउन तोड़े जाने की सम्भावना के चलते रवि नामक नाविक के साथ नाव से मड़ैयन घाट पर गश्त पर थे।अचानक मौसम बदला और बूंदाबांदी के साथ आयी तेज आंधी ने नाव सहित चारों लोगों को डुबा दिया।हादसे में किसी तरह सिपाही निर्मल यादव तैर कर सुरक्षित किनारे आ गया जबकि दरोगा रामजीत, सिपाही शशिकांत और नाव चलाने वाला मजदूर रवि यमुना के गहरे पानी में लापता हो गये। हादसे की सूचना पर डीएम संजीव सिंह,एसपी प्रशांत कुमार सहित क्षेत्रीय विधायक कृष्णा पासवान और पीएसी का फ्लड दस्ता मौके पर पहुंचे और जाल डालकर लापता पुलिसकर्मियों की खोज की थी ।अंधेरा और मौसम खराब हो जाने के चलते रेस्क्यू आॅपरेशन रोकना पड़ा। बनारस से एनडीआरएफ टीम के आने के बाद रविवार भोर पहर से शुरू रेस्क्यू ऑपरेशन में डूबी नाव से करीब पचास मीटर के क्षेत्र में गहरे पानी से एक एक कर तीनों के शव साढ़े दस बजे तक बरामद कर लिये गये।
लाइफ जैकेट होती तो बस जाती सभी की जान हादसे की शिकार दरोगा रामजीत एवं सिपाही शशिकांत के परिजनों का आरोप है कि यमुना में गश्त के लिए भेजे जाते समय यदि थाना प्रभारी द्वारा उनको लाइफ़जैकेट उपलब्ध करा दी जाती तो शायद उनकी जान बच जाती लेकिन ऐसा नहीं किया गया था।
फतेहपुर में कोरोना संक्रमण के विरुद्ध युद्ध में इसे शहादत बताते हुए राजनीतिक, सामाजिक संगठनों ने दु:ख व्यक्त किया है। पोस्टमार्टम के बाद दरोगा रामजीत 50 और सिपाही शशिकांत 26 के शवों को पुलिस लाइन में सलामी देकर परिजनो के साथ उनके घरों के लिये रवाना कर दिया गया है।